
विकासखंड गौर में मनरेगा का मजाक: मजदूरों की जगह जेसीबी और फर्जी मास्टर रोल से सरकारी धन की लूट
बस्ती: मनरेगा में भ्रष्टाचार की हद! पानी से भरे तालाबों में दिखाई 'खोखली खुदाई'; मनरेगा की 'कागजी खुदाई': पानी से भरे तालाबों में भी चल रहा लूट का खेल
अजीत मिश्रा (खोजी)
मनरेगा बना ‘लूट का जरिया’: पानी से भरे तालाबों में भी हो रही ‘कागजी खुदाई’
- सरकारी खजाने पर डाका: ग्राम पंचायत इटहिया में फर्जी मास्टर रोल से हो रहा मनरेगा का बंदरबांट
- खोद दिया तालाब, जबकि वहां पानी भरा था! मनरेगा के नाम पर जिम्मेदार अधिकारियों का कारनामा
बस्ती, विकासखंड गौर: सरकार की ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (मनरेगा) का मूल उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना और श्रमिकों को रोजगार देना था, लेकिन विकासखंड गौर की ग्राम पंचायत इटहिया में यह योजना भ्रष्टाचार और ‘कागजी खेल’ का पर्याय बन गई है।
कागजों पर ‘पसीना’, असलियत में ‘पानी’
हैरत की बात यह है कि जिन तालाबों और पोखरों में लबालब पानी भरा है, वहां भी मनरेगा के तहत खुदाई का काम चल रहा है! एक तरफ सरकारी खजाना खाली किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मौके पर एक भी मजदूर पसीना बहाता नहीं दिख रहा है। चौनपुर में पोखरा खुदाई के नाम पर 37 मजदूरों का ऑनलाइन मास्टर रोल जारी कर दिया गया, जबकि वहां न काम हुआ, न ही कोई मजदूर मौजूद था।
क्या जेसीबी से हो रही ‘खोखली’ कमाई?
मामला सिर्फ फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक तालाब की खुदाई जेसीबी मशीन से कराने का भी गंभीर आरोप है। मनरेगा के प्रावधानों के अनुसार, मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है; यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह नियमों का खुला उल्लंघन और सरकारी धन की खुली लूट है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे खेल में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की बू आ रही है। आरोप है कि तकनीकी सहायक दिनेश यादव न केवल मामले की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि इस फर्जीवाड़े को संरक्षण भी दे रहे हैं। जब मीडिया ने इस संबंध में सवाल किए, तो संतोषजनक जवाब देने के बजाय भ्रामक जानकारी दी गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है।
अब क्या प्रशासन की नींद खुलेगी?
यह ‘कागजी खुदाई’ का घोटाला अब सबके सामने है। सवाल यह है कि:
- क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
- क्या उन जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने सरकारी धन को निजी जेब समझ लिया है?
- क्या मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजना को ऐसे ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने दिया जाएगा?
जनता की नजरें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह है कि दोषियों पर कब तक लगाम कसी जाती है या फिर यह फाइल भी किसी दराज में दफन हो जाएगी।


















